शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर सोमवार को उज्जैन में सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा निभाई जा रही है।

Ujjain News ; शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर सोमवार को उज्जैन में सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा निभाई जा रही है। सुबह चौबीस खंबा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना कर मदिरा का भोग लगाया गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ शासकीय नगर पूजा दल करीब 26 किलोमीटर की यात्रा पर रवाना हुआ। परंपरा के अनुसार, दल शहर के लगभग 40 देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में पूजन करेगा।
मान्यता है कि नगर पूजा से शहर को अनिष्ट, महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से बचाने तथा नागरिकों की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यात्रा का समापन रात करीब 8 बजे अंकपात क्षेत्र स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में हांडी फोड़ने के साथ होगा।
महाअष्टमी पर शासन की ओर से होने वाली इस नगर पूजा को तांत्रिक स्वरूप का अनुष्ठान माना जाता है। सोमवार सुबह कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने चौबीस खंबा माता मंदिर में महामाया और महालया माता की पूजा-अर्चना की। इस दौरान माता को मदिरा अर्पित कर आरती की गई। सोलह शृंगार की सामग्री, चुनरी और बलबाकल का भोग भी लगाया गया।
पूजन के बाद शासकीय दल निर्धारित मार्ग पर यात्रा के लिए रवाना हुआ। परंपरा के अनुसार, मिट्टी की हांडी से मदिरा की धार बहाते हुए विभिन्न मंदिरों में पूजन किया जाता है। देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा का भोग लगाया जाता है, जबकि हनुमान मंदिरों में ध्वजा अर्पित की जाती है।
करीब 26 किलोमीटर की इस यात्रा में चामुंडा माता, भूखी माता, काल भैरव और चंड-मुंड नाशिनी सहित लगभग 40 मंदिरों में पूजन किया जाता है। प्रत्येक पड़ाव पर पूजा और आरती के बाद दल अगले मंदिर की ओर बढ़ता है। रास्ते में कई स्थानों पर नगरवासी यात्रा दल का स्वागत भी करते हैं।
परंपरा के अनुसार, यात्रा के दौरान गढ़कालिका माता मंदिर में पूजन के बाद समीप स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में अनुष्ठान किया जाता है। यहां हांडी फोड़ने के साथ नगर पूजा संपन्न होती है।
नगर पूजा के लिए मदिरा सहित अन्य पूजन सामग्री की व्यवस्था जिला प्रशासन की ओर से की जाती है। सामग्री की व्यवस्था से जुड़े पटवारी भगवान सिंह यादव के अनुसार, पूजा के लिए करीब 45 तरह की सामग्री दो दिन पहले जुटाई जाती है।
एक दिन पहले चौबीस खंबा माता मंदिर के पास काले चने और गेहूं उबालकर करीब 35 किलो बलबाकल तैयार किया जाता है। इसके साथ पूड़ी और भजिए भी बनाए जाते हैं। अष्टमी की सुबह करीब 6 बजे तक पूजन सामग्री तैयार कर ली जाती है।
पूजा में इस्तेमाल होने वाली मदिरा के लिए करीब एक सप्ताह पहले एसडीएम कार्यालय से आबकारी विभाग को पत्र भेजा जाता है। इसके बाद विभाग की ओर से पूजन के लिए 30 बोतल शराब निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। राजस्व विभाग के सहयोग से होने वाले इस आयोजन का खर्च करीब 18 हजार रुपये बताया गया है। पूजा की जिम्मेदारी पटवारी, कोटवार, कस्बा पटेल और संबंधित कर्मचारियों के पास रहती है।
नगर पूजा के दौरान कुछ प्रमुख देवी मंदिरों में सोलह शृंगार के सेट भी अर्पित किए जाते हैं। इनमें चौबीस खंबा मंदिर, चौंसठ योगिनी, नगरकोट महारानी, चामुंडा देवी, पद्मावती देवी, बहादुरगंज और गढ़कालिका मंदिर शामिल हैं।
नगर पूजा से जुड़े लाल कपड़े को लेकर भी स्थानीय मान्यता है कि इसे बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए घर में बांधा जाता है। यह परंपरा नगर की लोक-आस्था का हिस्सा मानी जाती है।
चौबीस खंबा मंदिर में पूजा के बाद सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हरसिद्धि माता मंदिर में भी जिला प्रशासन की ओर से शासकीय पूजन किया जाता है। इस दौरान माता हरसिद्धि की पूजा-अर्चना कर शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। वहीं, महाअष्टमी पर शहर के घरों में भी कुलदेवी का पूजन किया जाता है। नगर पूजा की सदियों पुरानी परंपरा में धार्मिक अनुष्ठान, प्रशासनिक व्यवस्था और लोक-आस्था का संगम देखने को मिलता है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार रात महाअष्टमी के अवसर पर उज्जैन के मां नगरकोट महारानी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना कर आरती की।

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