बालों की खूबसूरती और सेहत का ध्यान तो ज्यादातर लोग रखते हैं, लेकिन स्कैल्प यानी सिर की त्वचा की देखभाल को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं
-1.jpg&w=3840&q=75)
Health News: बालों की खूबसूरती और सेहत का ध्यान तो ज्यादातर लोग रखते हैं, लेकिन स्कैल्प यानी सिर की त्वचा की देखभाल को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि कई बार बाल धोने के कुछ समय बाद ही सिर से अजीब-सी गंध आने लगती है। इससे दूसरों के सामने असहज महसूस हो सकता है। स्कैल्प से बदबू आने के पीछे पसीना, तेल, धूल-मिट्टी, हेयर प्रोडक्ट्स का जमाव और त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया व फंगस के संतुलन में बदलाव जैसी वजहें हो सकती हैं। कुछ मामलों में डैंड्रफ या स्कैल्प से जुड़ी बीमारी भी इसकी वजह बन सकती है। अच्छी बात यह है कि सही सफाई और समस्या के कारण के अनुसार इलाज से इससे राहत मिल सकती है।
सिर की त्वचा पर तेल यानी सीबम और पसीना जमा होना सामान्य है। लेकिन जब इनके साथ धूल, मृत त्वचा और हेयर प्रोडक्ट्स के अवशेष जमा होने लगते हैं, तो स्कैल्प से अप्रिय गंध आ सकती है। इसके अलावा कुछ स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
- पसीना और ज्यादा ऑयल: स्कैल्प पर पसीना और तेल जमा होने से गंध पैदा हो सकती है।
- सफाई में कमी: बालों और स्कैल्प को ठीक से न धोने पर धूल, पसीना और प्रोडक्ट्स के अवशेष जमा रह सकते हैं।
- डैंड्रफ: डैंड्रफ के साथ खुजली, पपड़ी और ऑयली स्कैल्प की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में इसके साथ बदबू भी आती है।
- बैक्टीरिया और फंगस: स्कैल्प के सूक्ष्मजीवों के संतुलन में बदलाव या संक्रमण से गंध आ सकती है।
- त्वचा संबंधी समस्याएं: सेबोरिक डर्मेटाइटिस, सोरायसिस और फॉलिकुलिटिस जैसी स्थितियों में पपड़ी, सूजन या पस वाले दाने हो सकते हैं।
- ज्यादा पसीना आना: हाइपरहाइड्रोसिस की स्थिति में जरूरत से ज्यादा पसीना आता है, जिससे स्कैल्प पर नमी और गंध बढ़ सकती है।
स्कैल्प की नियमित सफाई इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, अगर बदबू की वजह कोई संक्रमण या त्वचा संबंधी बीमारी है, तो केवल शैंपू करने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होगी।
- स्कैल्प और बालों को अपनी जरूरत के अनुसार नियमित रूप से माइल्ड शैंपू से धोएं।
- ज्यादा पसीना आने या व्यायाम करने के बाद जरूरत के अनुसार सिर साफ करें।
- शैंपू के बाद बालों और स्कैल्प को अच्छी तरह सुखाएं। लंबे समय तक गीले बाल बांधकर न रखें।
- कंघी, तौलिया और तकिया साफ रखें। तौलिया किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- जरूरत से ज्यादा हेयर ऑयल और स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स लगाने से बचें, खासकर अगर स्कैल्प पहले से ऑयली है।
- डैंड्रफ या संक्रमण के लक्षण हों तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लें।
स्कैल्प की बदबू कम करने के लिए कई लोग टी ट्री ऑयल, एलोवेरा, एप्पल साइडर विनेगर, पुदीने का तेल या नींबू का रस इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इन उपायों से बदबू या संक्रमण ठीक होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। कुछ चीजें स्कैल्प में जलन और एलर्जी भी पैदा कर सकती हैं।
टी ट्री ऑयल: इसमें कुछ एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, लेकिन इससे स्कैल्प की बदबू या संक्रमण ठीक होने की गारंटी नहीं है। इसे सीधे त्वचा पर लगाने से जलन हो सकती है।
एप्पल साइडर विनेगर: इसे पानी में मिलाकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इससे स्कैल्प का पीएच संतुलित होने या संक्रमण ठीक होने के दावों के प्रमाण सीमित हैं। ज्यादा गाढ़ा घोल त्वचा में जलन पैदा कर सकता है।
एलोवेरा जेल: कुछ लोगों को इससे स्कैल्प को ठंडक महसूस हो सकती है, लेकिन यह संक्रमण का प्रमाणित इलाज नहीं है। इस्तेमाल से पहले उत्पाद की सामग्री जांचें।
पुदीने का तेल: इससे ठंडक महसूस हो सकती है, लेकिन इसका गाढ़ा तेल सीधे स्कैल्प पर लगाने से जलन हो सकती है। बदबू दूर करने के लिए इसे जरूरी उपचार न मानें।
नींबू का रस: इसे सीधे स्कैल्प पर लगाने से जलन और त्वचा में परेशानी हो सकती है। इसलिए बदबू या फंगस दूर करने के लिए नींबू का रस लगाने से बचना बेहतर है।
किसी भी नए उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें। स्कैल्प पर घाव, सूजन या संक्रमण होने पर घरेलू प्रयोग न करें। जलन, लालिमा या खुजली बढ़ने पर उत्पाद का इस्तेमाल बंद कर दें।
स्कैल्प से लगातार बदबू आने के साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो इसकी वजह त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।
सेबोरिक डर्मेटाइटिस: इसमें स्कैल्प पर खुजली, लालिमा और पपड़ी जम सकती है। यह अक्सर तेल वाली त्वचा और मालासेजिया नामक यीस्ट से जुड़ी होती है।
स्कैल्प सोरायसिस: यह एक इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारी है, जिसमें सिर की त्वचा पर लाल चकत्ते और मोटी, पपड़ीदार परतें बन सकती हैं। ज्यादा पपड़ी जमा होने या अन्य समस्याओं के साथ गंध महसूस हो सकती है।
स्कैल्प फॉलिकुलिटिस: इसमें बालों की जड़ों के आसपास सूजन हो सकती है। छोटे लाल दाने, खुजली और कभी-कभी पस वाले दाने दिखाई देते हैं। संक्रमण होने पर बदबू भी आ सकती है।
फंगल इन्फेक्शन: सिर में होने वाले फंगल संक्रमण में खुजली, पपड़ीदार चकत्ते और बाल झड़ने की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में इसके साथ अप्रिय गंध भी आती है।
हाइपरहाइड्रोसिस: इस स्थिति में जरूरत से ज्यादा पसीना आता है। स्कैल्प पर पसीना और तेल जमा होने से बदबू बढ़ सकती है।
अगर नियमित सफाई के बावजूद स्कैल्प की बदबू बनी रहती है, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। खासतौर पर इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:
- लगातार खुजली या लालिमा होना।
- स्कैल्प पर घाव, सूजन या पस वाले दाने दिखाई देना।
- बाल असामान्य रूप से झड़ने लगना।
- सिर पर मोटी पपड़ी जमना या दर्द होना।
- बदबू के साथ संक्रमण के दूसरे लक्षण दिखाई देना।
स्कैल्प की बदबू का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि इसकी वजह क्या है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार एंटी-डैंड्रफ शैंपू, एंटीफंगल दवाएं, बैक्टीरियल संक्रमण के लिए उपयुक्त दवाएं या सूजन कम करने वाले उपचार दे सकते हैं। ज्यादा पसीना आने की समस्या में भी उसके कारण के अनुसार इलाज किया जाता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड क्रीम या दवाओं का इस्तेमाल न करें। गलत दवा से कुछ संक्रमण बढ़ सकते हैं या लक्षण छिप सकते हैं।
स्कैल्प की सेहत के लिए केवल बालों की लंबाई और चमक पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। सिर की त्वचा को साफ रखना, पसीने और तेल को नियंत्रित करना, बालों को अच्छी तरह सुखाना और समस्या के लक्षणों को समय पर पहचानना जरूरी है। अगर बदबू की वजह पसीना, तेल या गंदगी है, तो नियमित सफाई से कुछ दिनों में राहत मिल सकती है। लेकिन डैंड्रफ या संक्रमण के कारण होने वाली बदबू को ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। इसलिए समस्या लगातार बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय सही जांच और इलाज कराना बेहतर है।

मखाना आज हेल्दी स्नैक के तौर पर काफी पसंद किया जाता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कैल्शियम, मैग्नीशियम व फॉस्फोरस जैसे खनिज पाए जाते हैं।
.jpg&w=3840&q=75)
नवरात्रि और दशहरे के दौरान पंडालों, गरबा आयोजनों और मेलों में लाउडस्पीकर की तेज आवाज आम है। हालांकि, लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुईं रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत एक वायरल इंस्टाग्राम स्टोरी के बाद चर्चा में हैं। CRPF सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया दिशानिर्देशों के संभावित उल्लंघन को लेकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
हर बड़ी ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट्स सीधे अपने फेसबुक फीड पर पाएं।
Follow Page