जबलपुर से इंदौर तक कुल मिलाकर सात जिले में अलग अलग तरह की इंडस्ट्री की योजना पड़ी हुई है, आप बस एक बार देखो कि आपके जिले में IT, फूड प्रोसेसिंग या लॉजिस्टिक्स का क्या प्रोग्राम है. क्या कुछ खास तय हुआ है?

जबलपुर , नरसिंहपुर , रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर, इन सात जिलों में “उद्योग को तेजी” देने वाला प्लान बन गया है , हां थोड़ा सा जोर उसी दिशा पर है । गुरुवार (15 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जो कैबिनेट बैठक हुई, उसने जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए 100 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी वाली एक विशेष प्रयोजन कंपनी यानी SPV को मंजूरी दी है ।
इन दोनों इलाकों में फूड प्रोसेसिंग , फूड पार्क, और वेयरहाउसिंग पर फ़ोकस रहेगा। योजना के मुताबिक इससे किसानों को उपज का भंडारण करने, और फिर उसे बाजार तक ले जाने में ज्यादा मदद, और साफ तौर पर बेहतर सुविधा मिल सकती है , जैसा कि सरकार बोल रही है।
जबलपुर: इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा और एयरोस्पेस की सहायक यूनिट्स और लॉजिस्टिक्स।
भोपाल: IT, टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और नॉलेज सर्विसेज में निवेश को बढ़ावा, यानी नया पूंजी रूट।
इंदौर: IT, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र, साथ ही इंदौर-देवास-पीथमपुर वाले मौजूदा औद्योगिक नेटवर्क से जोड़।
सीहोर और देवास की बात करें तो यहां खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाओं पर काम करने की योजना है। इलाके की उपलब्धता और जरूरत को देखकर अलग-अलग तरह के उद्योग विकसित किए जाएंगे, एक ही पैटर्न नहीं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक मार्च 2028 तक कॉरिडोर में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश, और करीब तीन लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। शुरुआती अनुमान में लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार की बात कही गई है। तीन साल के बड़े लक्ष्य में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश और 6 लाख से ज्यादा रोजगार का आंकड़ा रखा गया है। ये सब “शुरुआती” प्रोजेक्शन हैं , असल में DPR बनते समय और निवेशकों से बातचीत के बाद तस्वीर स्पष्ट होगी।
पहले चरण में करीब 10 हजार एकड़ में तीन से पांच प्राथमिक औद्योगिक हब बनाए जाने हैं। उद्योगों को जमीन के साथ बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज, और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी चीजें मिलेंगी। श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल, कौशल विकास केंद्र, और साथ में हरित क्षेत्र भी बनाने की सोच है, ताकि ये हब औद्योगिक टाउनशिप जैसा आकार ले सके। अंतिम लोकेशन जमीन की उपलब्धता, पानी-बिजली-सड़क, कनेक्टिविटी, और निवेशकों की डिमांड देखकर तय होगी।
नई कंपनी का नाम प्रस्तावित है: 'जबलपुर–इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' , और ये पूरी तरह राज्य सरकार की होगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली काउंसिल निगरानी रखेगी। कंपनी जमीन, बुनियादी सुविधाओं, और निवेश का इंतजाम देखेगी, जबकि सड़क वगैरह बनाने का जिम्मा संबंधित एजेंसियों के पास रहेगा। अगले 30 दिन में कंपनी बनाने की तैयारी, छह महीने में GIS मैपिंग और लैंड बैंक तैयार करने, और 12 महीने में हब का मास्टर प्लान व DPR बनाने का लक्ष्य रखा गया है। तकनीकी अध्ययन छह से नौ महीने में पूरा होगा , फिर सुविधाओं का विकास और जमीन आवंटन वाला काम आगे बढ़ेगा। सरकार को उम्मीद है कि महाकौशल समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में उद्योग को गति, और रोजगार के नए मौके निकलेंगे।

मध्य प्रदेश की भाजपा राजनीति में चर्चा बढ़ी है। मिश्रा और खंडेलवाल की भेंट के मकसद पर कयास हैं, पुष्टि नहीं।
मंदसौर विधायक विपिन जैन के भाई नितिन जैन के खिलाफ दलौदा की सरपंच दुर्गा कैथवास की शिकायत पर SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मानपुर जनपद पंचायत के गुरुवाही गावं में मुख्यमंत्री 14 अक्टूबर को सम्मेलन में शामिल होंगे , और साथ ही जिले को 136 विकास कार्य भी मिलेंगे । ऐसे में लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं, और कार्यक्रम को लेकर हलचल देखी जा रही है।
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