महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री तुलसीराम सिलावट कॉन्क्लेव में मौजूद रहे। मालवा के सोया उद्योग की बातें और सम्मान समारोह पढ़ें।

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार (16 अक्टूबर) को सोयाबीन उद्योग की बड़ी हलचल रही। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के दो दिवसीय 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मौजूद रहे। कॉन्क्लेव 16 और 17 अक्टूबर को चल रहा है।
कार्यक्रम में देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, उद्योगपति, नीति निर्माता और किसान शामिल हुए। मंच पर सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर और विजय पाल सहित सोयाबीन उद्योग, खेती और व्यापार जगत के कई प्रतिनिधि भी रहे। कॉन्क्लेव की थीम 'आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन' है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है और उन्होंने मालवा को सोयाबीन की राजधानी कहा। उन्होंने सोया प्रोसेसिंग, खाद्य तेल उद्योग और कृषि आधारित निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके मुताबिक मध्यप्रदेश देश की फूड बास्केट के रूप में जाना जाता है, खेती और सोयाबीन अर्थव्यवस्था के अहम आधार हैं, और खराब मौसम व अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में बड़ा योगदान दिया।
सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताया और कहा कि सरकार किसानों के हित में फैसले ले रही है। उन्होंने भावांतर योजना का उल्लेख किया, जिसमें किसानों को उपज की कीमत में अंतर की राशि दी जाती है, और सरकार के सहयोग व मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए जुटी है। प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और भंडारण, विपणन व मूल्य संवर्धन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सोयाबीन किसानों की आमदनी, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन-आधारित पोषण से भी जुड़ा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार सोयाबीन की प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में विकास की संभावनाएं हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता और उत्पादों में विविधता से यह क्षेत्र मजबूत होगा। खाद्य तेल उद्योग का विस्तार भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा में काम कर रही है और निवेशकों से लगातार संवाद हो रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे, और उनके अनुसार 30 प्रतिशत से अधिक धरातल पर उतारे जा चुके हैं। सरकार चाहती है कि ये प्रस्ताव असली परियोजनाएं बनें और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को मिलाकर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसकी विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) को गुरुवार (15 अक्टूबर) को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सस्ती बिजली, जमीन और पानी निवेशकों को आकर्षित करते हैं, और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से इलाकों के संसाधनों और औद्योगिक संभावनाओं को सामने लाया गया है। सरकार का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय रोजगार बढ़ाना है। युवाओं के रोजगार, औद्योगिक निवेश और किसानों की आय के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मिलकर प्रयास हो रहे हैं, जिनमें सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में उल्लेखनीय काम करने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। सोपा चेयरमैन नरेश गोयनका ने मुख्यमंत्री को शॉल और श्रीफल भेंट किया।
आयोजन का उद्देश्य भारतीय खाद्य तेल और सोयाबीन क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है।

मखाना आज हेल्दी स्नैक के तौर पर काफी पसंद किया जाता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और कैल्शियम, मैग्नीशियम व फॉस्फोरस जैसे खनिज पाए जाते हैं।

जबलपुर से इंदौर तक कुल मिलाकर सात जिले में अलग अलग तरह की इंडस्ट्री की योजना पड़ी हुई है, आप बस एक बार देखो कि आपके जिले में IT, फूड प्रोसेसिंग या लॉजिस्टिक्स का क्या प्रोग्राम है. क्या कुछ खास तय हुआ है?

मध्य प्रदेश की भाजपा राजनीति में चर्चा बढ़ी है। मिश्रा और खंडेलवाल की भेंट के मकसद पर कयास हैं, पुष्टि नहीं।
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