मंदसौर में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए साइबर ठगी के मामले की जांच में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है।


Matrimonial Site Fraud: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के शामगढ़ में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई साढ़े 7 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में पकड़े गए आरोपियों को पाकिस्तान में बैठे लोगों से निर्देश मिल रहे थे। जांच एजेंसियां अब मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस, बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट की जानकारी खंगाल रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस राष्ट्रीय एजेंसियों की मदद लेने की तैयारी में है।
शामगढ़ पुलिस ने 29 सितंबर को अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में मामला मैट्रिमोनियल साइट के जरिए एक महिला से ठगी का सामने आया था।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को आरोपियों के कथित विदेशी संपर्कों के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य आरोपी बिहार निवासी टोनी कुमार है। आरोप है कि ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पाकिस्तान भेजा जाता था। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक अकाउंट, सिम कार्ड और क्रिप्टो वॉलेट की जांच कर रही है।
रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल के मुताबिक, मैट्रिमोनियल साइट पर पहचान बनाने के बाद महिला को महंगे गिफ्ट का लालच दिया गया। इसके बाद कस्टम क्लीयरेंस और दूसरे शुल्क के नाम पर रकम जमा कराई गई। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे। कुछ लोग बैंक खातों में आई रकम निकालकर उसे आगे भेजने का काम करते थे। डीआईजी के अनुसार, डिजिटल जांच के दौरान पाकिस्तान एंगल सामने आया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम आखिर किन लोगों तक पहुंच रही थी और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था।
सीएसपी जितेंद्र भास्कर के मुताबिक, आरोपियों के पाकिस्तान में मौजूद लोगों से संपर्क की जानकारी मिली है। वहीं से मिले निर्देशों के आधार पर स्थानीय लोगों के बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए जाते थे। उन खातों से रकम निकालकर आगे बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। जांच में इस्तेमाल किए गए कुछ मोबाइल नंबरों के आईपी एड्रेस पाकिस्तान से लिंक मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस इस डिजिटल कनेक्शन की तकनीकी जांच कर रही है।
पुलिस की जांच में मुख्य आरोपी टोनी कुमार को लेकर भी जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, वह पहले खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ था। इसके बाद वह इसी तरह की गतिविधियों में शामिल हो गया और धीरे-धीरे गिरोह का मुख्य सरगना बन गया। आरोपी करीब 6 महीने में 11 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा रहा है। पुलिस को इस नेटवर्क में 100 से अधिक साइबर घटनाओं के संभावित संबंधों की जानकारी मिली है।
ठगी का पूरा मामला शामगढ़ थाना क्षेत्र की एक युवती की शिकायत के बाद सामने आया। युवती ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने खुद को NRI बताकर युवती से संपर्क किया। फर्जी तस्वीरों और फर्जी परिजनों के जरिए उसका भरोसा जीता और शादी का झांसा दिया।
इसके बाद आरोपी ने विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की बात कही। बाद में युवती को बताया गया कि गिफ्ट कस्टम विभाग में फंस गया है और उसे छुड़ाने के लिए कस्टम ड्यूटी, सेल्स टैक्स और अन्य शुल्क जमा करने होंगे।
इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाए गए। युवती ने कई किश्तों में करीब 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में उसे ठगी का अहसास हुआ और उसने शामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में करीब 6 महीने के दौरान 11 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। जांच में 100 से अधिक साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी मिलने की बात कही गई है। आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल, 150 से ज्यादा सिम कार्ड और 5 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।
जांच में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। नेटवर्क के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग काम करते थे। एक टीम म्यूल बैंक अकाउंट और सिम कार्ड उपलब्ध कराती थी। पुलिस के मुताबिक, आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली, बिहार और भोपाल समेत अलग-अलग जगहों से बैंक अकाउंट और सिम उपलब्ध कराए जाने की जानकारी मिली है।
दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर बैंक खातों से रकम निकालती थी। खाता फ्रीज होने के बाद आरोपी मोबाइल, सिम और एटीएम कार्ड को फेंक देते थे।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी ठगी की रकम का 10% हिस्सा अपने पास रखते थे। बाकी 90% पाकिस्तान भेज देते थे। विदेशी कनेक्शन सामने आने के बाद मंदसौर पुलिस मामले की जांच को और व्यापक कर रही है। पुलिस आरोपियों के क्रिप्टो वॉलेट, बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल डेटा और डिजिटल फुटप्रिंट की जांच कर रही है। मामले में केंद्रीय और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों से सहयोग लिए जाने की बात कही गई है।
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