उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन और इंदौर के उद्योगपतियों से संवाद, गोरेलाल जी ने विनोद कुमार की यादें साझा कीं।


उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन और आरती में शामिल होने वाले RSS के वरिष्ठ प्रचारक विनोद कुमार को शुक्रवार की श्रद्धांजलि सभा में उनके साथियों ने याद किया। सभा में पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, अशोक जी पांडे, गोरेलाल जी और संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते समेत कई लोग शामिल हुए।
गोरेलाल जी ने बताया कि मूल रूप से उत्तर प्रदेश से आने वाले विनोद जी दायित्वों से मुक्त होने के बाद उज्जैन में रहे। नियमित व्यायाम, स्नान-ध्यान, जप-तप, बाबा महाकाल के दर्शन और आरती में हिस्सा लेना, साथ ही समाज के अलग-अलग वर्गों और कार्यकर्ताओं से सहज बातचीत उनकी दिनचर्या में बनी रही। बड़े पदों से हटने के बाद भी उनके व्यवहार में बदलाव नहीं आया। गोरेलाल जी ने गीता का श्लोक भी पढ़ा: “मुक्तसंगोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः। सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते॥” और कहा कि ये गुण विनोद जी में सहज दिखते थे।
गोरेलाल जी के अनुसार विनोद जी लोगों की क्षमता पहचानकर उन्हें समाज और संगठन के कामों से जोड़ने में माहिर थे। घुमंतू समाज के जो लोग आगे चलकर इंदौर में उद्योग लगा चुके थे, उन्हें उन्होंने आत्मीयता से संघकार्य से जोड़ा। दीपावली मिलन जैसे आयोजनों में उद्योग जगत के लोगों को बुलाकर वे धीरे-धीरे उन्हें संघ की विचारधारा से परिचित कराते गए।
महाकौशल में प्रांत प्रचारक के रूप में विनोद जी कार्यकर्ताओं को लेकर संवेदनशील थे, पर संगठन-विरोधी गतिविधियों में कड़े फैसले लेने से भी नहीं हटते थे। प्रयागराज कुंभ में करीब एक महीने वे वहां आने वाले पुराने कार्यकर्ताओं, साधु-संतों और पूर्व प्रचारकों की आवभगत और उनकी सक्रियता बनाए रखने में जुटे रहे।
दीपक विस्पुते ने कहा कि विनोद जी का जीवन राष्ट्रकार्य, संगठन-निष्ठा और समाज के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल था। करीब 55 साल के प्रचारक जीवन में वे प्रांत प्रचारक, क्षेत्र प्रचारक और केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। विस्पुते के मुताबिक विरोधी भी उनकी सादगी के प्रशंसक थे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संत रविदास महाकुंभ, टंट्या मामा भील और भीमा नायक से जुड़े कार्यों में विनोद जी की अंतर्दृष्टि का खास योगदान रहा। उनके अनुसार वे बाहर से कठोर और भीतर से कोमल थे। कप्तान सिंह सोलंकी ने बताया कि कुछ दिन पहले अस्पताल में विनोद जी बोल नहीं पा रहे थे और उन्हें ऑक्सीजन पाइप लगी थी। यह कहते हुए वे भावुक हो गए। अशोक जी पांडे ने उन्हें कार्यकर्ता की चिंता, संवेदना और दूरदृष्टि का प्रतिरूप बताया।
गोरेलाल जी ने बताया कि निधन से चार दिन पहले बड़ौदा-मेरठ प्रवास में उनकी विनोद जी से मुलाकात हुई थी। बीमारी के बावजूद संकल्प और काम के प्रति समर्पण साफ दिख रहा था। उज्जैन पहुंचने के करीब 12 घंटे के भीतर उन्होंने देह त्याग दी। उनके अनुसार विनोद जी में मां की करुणा, पिता की चिंता और गुरु का मार्गदर्शन एक साथ दिखता था। सभा में संघ और संघ प्रेरित संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आत्मीय लोग आए। अंत में सबने मौन रखा और चित्र पर पुष्प अर्पित किए।

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