धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। मध्यप्रदेश के रतलाम स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में इस बार करीब 2 करोड़ रुपये के नोटों, 40 देशों की विदेशी करेंसी और सोने-चांदी के आभूषणों से भव्य सजावट की गई है।
Ratlam News: धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। मध्यप्रदेश के रतलाम स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में इस बार करीब 2 करोड़ रुपये के नोटों, 40 देशों की विदेशी करेंसी और सोने-चांदी के आभूषणों से भव्य सजावट की गई है। मंदिर में नोटों की गड्डियों से दीवारें, वंदनवार, गमले और पेड़ बनाए गए हैं। मां लक्ष्मी का श्रृंगार भी भक्तों की ओर से चढ़ाए गए नोटों और जेवरों से किया गया है। महालक्ष्मी के दर्शन के लिए सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई। सुबह की आरती में एसपी अमित कुमार भी शामिल हुए। दूसरे प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे।
मंदिर के पंडित अश्विनी पुजारी के मुताबिक, सजावट के लिए नोट जमा कराने का सिलसिला शरद पूर्णिमा से शुरू हो जाता है। इस बार करीब 2 हजार भक्तों ने नकदी और आभूषण जमा कराए हैं। धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा के बाद मंदिर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया। मंदिर की सजावट में एक रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नोटों का इस्तेमाल किया गया है। नोटों से वंदनवार, गमले और पेड़ तैयार किए गए हैं। 100 और 200 रुपये के नोटों से मोरपंख भी बनाए गए हैं।
मंदिर की सजावट में 40 देशों की विदेशी करेंसी और डॉलर भी शामिल किए गए हैं। इन्हें लेमिनेशन कर सुरक्षित तरीके से सजाया गया है। गर्भगृह में ढाई-ढाई किलो चांदी के पांच हाथी और 52 छोटे चांदी के हाथी रखे गए हैं। पहली बार चांदी के 45 सिक्कों से जड़ी साड़ी भी आकर्षण का केंद्र बनी है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सोने और चांदी के सिक्के भी लगाए गए हैं।
शरद पूर्णिमा से 35 लोगों की टीम मंदिर की सजावट में जुटी हुई है। कलाकार कपिल श्रोत्रिय पिछले तीन साल से यहां सेवा दे रहे हैं। उनके मुताबिक, नोटों की लड़ियां बनाते समय पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नोटों को अलग-अलग पॉलिथीन में पैक किया जाता है, ताकि वे सुरक्षित रहें। कलाकार ऐश्वर्य सोमानी ने बताया कि नोटों को धागे में पिरोते समय काफी सावधानी रखनी पड़ती है। नोटों में सुई की नोक के बराबर छेद किया जाता है और बारीक धागों का इस्तेमाल होता है। ज्यादा दबाव पड़ने पर नोट फट सकते हैं।
इस मंदिर की खास परंपरा यह है कि भक्तों की ओर से सजावट के लिए जमा कराई गई नकदी और आभूषण पांच दिन बाद उन्हें वापस लौटा दिए जाते हैं। मंदिर प्रबंधन के मुताबिक, जमा की गई संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। रजिस्टर में भक्तों का नाम, पता, फोटो, मोबाइल नंबर और जमा राशि व जेवरों की जानकारी दर्ज की जाती है। इस बार पहली बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू की गई है। भक्त घर बैठे पंजीकरण कराकर बाद में मंदिर पहुंचकर अपनी राशि जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के पंजीकरण पर टोकन दिया जाता है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी के दरबार में धन और आभूषण रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है। कई भक्त अपनी जमा कराई गई नोटों की गड्डियां अगले साल फिर सजावट के लिए दे जाते हैं।
मंदिर की सजावट और जमा धन-संपत्ति की व्यवस्था प्रशासन की निगरानी में की जाती है। सुरक्षा के लिए बंदूकधारी गार्ड और पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। गर्भगृह से लेकर पूरे मंदिर परिसर तक 24 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी की जा रही है। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और माता सरस्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां मां लक्ष्मी को आठ स्वरूपों में विराजमान माना जाता है। इनमें आदि लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, लक्ष्मीनारायण, धन लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी शामिल हैं।

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