1999 के कारगिल युद्ध में जवानों के साथ रहे नाना की कहानी, जिनका 75 की उम्र में निधन हुआ।

गुरुवार सुबह आखिर हुआ क्या, जिसके बाद नाना पाटेकर नहीं रहे खबरों के मुताबिक 75 साल के नाना को कार्डियक अरेस्ट आया, फिर करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया लेकिन भी उन्हें बचा नहीं जा सका। सुबह 5:20 बजे उनका निधन हो गया। वहीं, मेडिको-लीगल केस दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमॉर्टम भी कराया जाएगा, ऐसा बताया जा रहा है।
नाना 100 से ज्यादा फिल्मों में नजर आए, और उनकी खासियत यही रही कि वे संजीदा भी कर लेते थे ,और हलके-फुल्के टाइप रोल भी। बस हिंदी ही नहीं ,मराठी सिनेमा में भी उनका काम रहा। ‘परिंदा’ के अन्ना वाले रोल ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, और नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी आए। ‘क्रांतिवीर’ में बेस्ट एक्टर और ‘अग्निसाक्षी’ में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के नेशनल अवॉर्ड जोड़कर उनके पास तीन पुरस्कार रहे। फिर 2013 में उन्हें पद्मश्री भी मिला, ये बात भी सामने आती रही।
सिर्फ गंभीर भूमिका तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नाना ने ‘वेलकम’ (2007) में गैंगस्टर उदय शेट्टी बनकर लोगों को खूब एंटरटेन किया। उनका अंदाज़ दर्शकों को खूब पसंद आया, और ‘वेलकम बैक’ में भी वही किरदार फिर से देखने को मिला।
‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में मेजर वाला किरदार उनके लिए “जैसे होना” वाला था, इसलिए उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ फौजी ट्रेनिंग ली। बताया जाता है कि ये ट्रेनिंग करीब तीन साल चली। इसके बाद वे टेरिटोरियल आर्मी में गए, और मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल बने, और फिर 2013 में रिटायर हो गए।
1999 के कारगिल युद्ध के समय नाना ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से इजाजत ली थी। इसके बाद वे करीब 15-20 दिन तक आगे के इलाकों में जवानों के साथ रहे। उनकी मौजूदगी द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसी जगहों तक बताई जाती है। रिपोर्ट्स में ये भी मिलता है कि उन्होंने सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ कुछ समय बिताया। सैनिकों को वे असली हीरो ही मानते रहे, और उनकी सोच यही रही कि हर शख्स को अपनी ताकत के हिसाब से देश के लिए योगदान करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना के निधन पर गहरा शोक जताया। उन्होंने कहा कि नाना के अभिनय में गहराई के साथ एक अलग असर वाली मौजूदगी थी। मोदी ने नाना के किरदारों और उनकी रचनात्मकता को याद किया और कहा कि आगे आने वाली पीढ़ियां भी उनकी भूमिकाओं को संजोए रखेंगी। उन्होंने नाना को बेबाक और साफ सोच वाले इंसान की तरह बताया। हिंदी-मराठी सिनेमा में योगदान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
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