भारत के नक्शे में बीचों-बीच स्थित मध्य प्रदेश को 'हार्ट ऑफ इंडिया' यानी भारत का दिल कहा जाता है। खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिर, सांची का बौद्ध स्तूप, भीमबेटका की प्राचीन गुफाएं और कान्हा-बांधवगढ़ के जंगल प्रदेश की पहचान हैं।
Bhopal News: भारत के नक्शे में बीचों-बीच स्थित मध्य प्रदेश को 'हार्ट ऑफ इंडिया' यानी भारत का दिल कहा जाता है। खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिर, सांची का बौद्ध स्तूप, भीमबेटका की प्राचीन गुफाएं और कान्हा-बांधवगढ़ के जंगल प्रदेश की पहचान हैं। हर साल 1 नवंबर को मध्य प्रदेश अपना स्थापना दिवस मनाता है। लेकिन आज जिस स्वरूप में हम मध्य प्रदेश को देखते हैं, वह हमेशा से ऐसा नहीं था। 1956 में कई पुराने प्रशासनिक क्षेत्रों को मिलाकर इस राज्य का गठन हुआ और साल 2000 में छत्तीसगढ़ अलग होकर नया राज्य बना।
मध्य प्रदेश के गठन की कहानी देश की आजादी के दौर से शुरू होती है। साल 1947 में भारत आजाद हुआ, तब आज के मध्य प्रदेश का क्षेत्र कई प्रशासनिक इकाइयों और रियासतों में बंटा हुआ था। इनमें मध्य प्रांत और बरार, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल शामिल थे। इसके अलावा राजस्थान के कोटा जिले की सिरोंज सब-डिवीजन को भी नए मध्य प्रदेश में शामिल किया गया।
राज्यों की सीमाएं तय करने के लिए दिसंबर 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाया गया। आयोग की सिफारिशों के बाद राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 लागू हुआ। इसके तहत 1 नवंबर 1956 को इन अलग-अलग क्षेत्रों को मिलाकर नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया।
नए राज्य के गठन के साथ ही राजधानी के चयन का सवाल भी सामने आया। इस दौड़ में भोपाल के अलावा ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे शहरों के नाम भी चर्चा में थे। मध्य भारत के दौर में ग्वालियर और इंदौर बारी-बारी से राजधानी का काम संभालते थे। हालांकि, नए मध्य प्रदेश की राजधानी के लिए भोपाल को चुना गया। इसकी भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक सुविधाओं को इसके पक्ष में अहम माना गया। 1 नवंबर 1956 को भोपाल नए मध्य प्रदेश की राजधानी बना। इसी दिन पंडित रविशंकर शुक्ल ने प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि, 31 दिसंबर 1956 को उनका निधन हो गया।
मध्य प्रदेश को भारत का दिल कहने की एक बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश के मध्य में स्थित है और इसकी सीमाएं पांच राज्यों से मिलती हैं। उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात और उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है। करीब 3 लाख 8 हजार 252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ मध्य प्रदेश, राजस्थान के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। लेकिन इसकी पहचान सिर्फ भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी इसे खास बनाती है।
मध्य प्रदेश में तीन ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं, जिन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। पहला है खजुराहो के मंदिर, जो अपनी बारीक नक्काशी और शानदार स्थापत्य कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इन्हें 1986 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। दूसरा है रायसेन जिले का सांची स्तूप। इसका इतिहास मौर्य सम्राट अशोक से जुड़ा है। सांची के बौद्ध स्मारकों को 1989 में यूनेस्को की सूची में जगह मिली। तीसरा है भीमबेटका, जहां चट्टानों पर बने प्राचीन चित्र मानव जीवन के शुरुआती दौर की कहानी बताते हैं। इसे 2003 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
मध्य प्रदेश का मौजूदा नक्शा साल 2000 में हुए एक बड़े बदलाव के बाद सामने आया। दरअसल, छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। इसके पीछे क्षेत्र की अलग सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक जरूरतें प्रमुख वजहों में शामिल थीं। इसके बाद संसद ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 पारित किया। इस कानून के तहत 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना। पुराने मध्य प्रदेश के 16 जिले नए राज्य छत्तीसगढ़ में शामिल किए गए। खास बात यह है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही अपना स्थापना दिवस 1 नवंबर को मनाते हैं। विभाजन के बाद मध्य प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल कम हुआ और दोनों राज्यों की अलग-अलग सरकारें, विधानसभाएं और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अस्तित्व में आईं।
आज मध्य प्रदेश अपनी अलग भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। भोपाल प्रदेश की राजधानी और प्रशासनिक केंद्र है, तो इंदौर व्यापार और उद्योग के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। उज्जैन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। जबलपुर अपने प्राकृतिक पर्यटन स्थलों और ग्वालियर अपने ऐतिहासिक किले व संगीत परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश को 'टाइगर स्टेट' के नाम से भी जाना जाता है। यहां कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना और सतपुड़ा जैसे प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। नर्मदा नदी, अमरकंटक, ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर और चित्रकूट जैसे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल भी प्रदेश की पहचान का हिस्सा हैं।
इस तरह 1956 में कई पुराने क्षेत्रों को मिलाकर बने मध्य प्रदेश ने साल 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद अपना मौजूदा स्वरूप हासिल किया। 1 नवंबर 2026 को प्रदेश अपने गठन के 70 साल पूरे कर रहा है। इन सात दशकों में इसकी भौगोलिक सीमाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक पहचान में कई बदलाव आए, लेकिन देश के मध्य में स्थित होने की वजह से 'हार्ट ऑफ इंडिया' के रूप में इसकी पहचान आज भी कायम है।
पांढुर्णा में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। घर में पानीपुरी बनाने वाली मशीन के पास खेल रहे 9 साल के बच्चे का हाथ मशीन में फंस गया।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सड़क की बदहाल स्थिति के चलते एक बुजुर्ग मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को खटिया का सहारा लेना पड़ा।
.jpeg&w=3840&q=75)
MP राज्यसभा उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी ने नामांकन दाखिल किया। CM मोहन यादव ने स्वागत किया, जबकि 12 नवंबर को मतदान होगा।
हर बड़ी ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट्स सीधे अपने फेसबुक फीड पर पाएं।
Follow Page