मुंह में बनने वाली लार सिर्फ भोजन चबाने और निगलने में मदद नहीं करती, बल्कि दांतों को सड़ने से बचाने, स्वाद महसूस करने और मुंह को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।
Health News: क्या आपको भी बार-बार पानी पीने के बावजूद मुंह सूखने की शिकायत रहती है? क्या खाना निगलने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है या रात में मुंह सूखने के कारण नींद खुल जाती है? अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। यह जेरोस्टोमिया यानी ड्राई माउथ का संकेत हो सकता है। मुंह में बनने वाली लार सिर्फ भोजन चबाने और निगलने में मदद नहीं करती, बल्कि दांतों को सड़ने से बचाने, स्वाद महसूस करने और मुंह को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। इसकी कमी से दांतों में कैविटी, मुंह से बदबू और खाने-पीने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आज 'फिजिकल हेल्थ' में जानते हैं कि जेरोस्टोमिया यानी ड्राई माउथ क्या है, इसके सामान्य लक्षण और कारण क्या हैं, किन बीमारियों में मुंह सूख सकता है और इससे राहत पाने के लिए क्या करना चाहिए।
जेरोस्टोमिया ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को मुंह में पर्याप्त लार न होने या लगातार सूखापन महसूस होता है। मुंह में लार का निर्माण सैलिवरी ग्लैंड्स यानी लार बनाने वाली ग्रंथियों में होता है। ये ग्रंथियां मुंह को नम रखने, भोजन चबाने और निगलने, स्वाद महसूस करने और मुंह को साफ रखने में मदद करती हैं। ड्राई माउथ एक हेल्थ कंडीशन है, लेकिन अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। इसे शरीर में होने वाले बदलावों या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या से जुड़े लक्षण के तौर पर देखा जाता है। इसके पीछे सामान्य कारण भी हो सकते हैं और कुछ बीमारियां भी।
मुंह में लार का निर्माण तीन प्रमुख सैलिवरी ग्लैंड्स में होता है। ये ग्रंथियां ब्लड से पानी और जरूरी तत्व लेकर लार बनाती हैं। छोटी-छोटी नलियों के जरिए यह लार मुंह तक पहुंचती है। जब हम खाने को देखते हैं, उसकी खुशबू महसूस करते हैं या उसे चबाते हैं, तो ब्रेन इन ग्रंथियों को ज्यादा लार बनाने का संकेत देता है।
- भोजन को नरम करके चबाने और निगलने में मदद करना।
- इसमें मौजूद एंजाइम की मदद से कार्बोहाइड्रेट के पाचन की शुरुआत करना।
- मुंह में एसिड को नियंत्रित करना।
- दांतों को सड़ने से बचाने में मदद करना।
- मुंह के टिश्यू को नम रखना और भोजन के बचे हुए कणों को हटाने में मदद करना।
लार कम बनने पर इन सभी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है।
ड्राई माउथ का एक अहम संकेत यह है कि जिस खाने को पहले आसानी से निगल लेते थे, उसे खाने के लिए अब पानी की जरूरत पड़ने लगे। इसके अलावा लंबे समय तक बोलने पर मुंह में असहजता महसूस होना या रात में मुंह सूखने के कारण नींद खुलना भी इसके संकेत हो सकते हैं। अगर बार-बार पानी पीने के बावजूद मुंह में नमी नहीं रहती, सूखा खाना निगलने में परेशानी होती है या रात में बार-बार मुंह सूखता है, तो लगातार ड्राई माउथ की आशंका हो सकती है।
नहीं, दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। प्यास शरीर में पानी की जरूरत महसूस होने का संकेत है, जबकि ड्राई माउथ में मुंह के भीतर सूखापन महसूस होता है। ऐसा लार कम बनने या मुंह में नमी कम होने के कारण हो सकता है। डिहाइड्रेशन में दोनों समस्याएं एक साथ हो सकती हैं। हालांकि, कुछ लोगों को पर्याप्त पानी पीने के बावजूद मुंह सूखने की शिकायत रहती है।
ड्राई माउथ के सबसे आम कारणों में कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट, शरीर में पानी की कमी और सोते समय मुंह से सांस लेना शामिल हैं। इसके अलावा कुछ बीमारियां और शारीरिक स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।
हां, कई दवाओं के साइड इफेक्ट के तौर पर मुंह सूखने की समस्या हो सकती है। इनमें शामिल हैं:
- एलर्जी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीहिस्टामिन दवाएं।
- डिप्रेशन और एंग्जाइटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं।
- हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं।
- पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं यानी डाइयूरेटिक्स।
ये दवाएं लार बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं या शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसका जोखिम इस बात पर भी निर्भर करता है कि कौन-सी दवा ली जा रही है, उसकी खुराक कितनी है और व्यक्ति एक साथ कितनी दवाएं ले रहा है।
हां, डायबिटीज में भी ड्राई माउथ की समस्या हो सकती है। जब ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, तो किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को यूरिन के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करती है। इस प्रक्रिया में शरीर से पानी भी ज्यादा निकल सकता है। इससे डिहाइड्रेशन होता है और मुंह सूखने लगता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने से सैलिवरी ग्लैंड्स के काम पर भी असर पड़ सकता है। इससे लार कम बनने और मुंह में सूखापन महसूस होने की समस्या बढ़ सकती है।
हां, थायरॉइड और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में भी मुंह सूखने की समस्या हो सकती है। थायरॉइड हार्मोन का स्तर असंतुलित होने पर कुछ लोगों को मुंह में सूखापन महसूस हो सकता है। हालांकि, हर थायरॉइड मरीज में ऐसा होना जरूरी नहीं है। ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही स्वस्थ टिश्यू पर हमला करने लगता है। इससे लार बनाने वाली ग्रंथियां प्रभावित हो सकती हैं। स्जोग्रेन सिंड्रोम ऐसी ही एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें लार और आंसू बनाने वाली ग्रंथियां प्रभावित होती हैं। इसके कारण मुंह और आंखों में लगातार सूखापन हो सकता है।
तनाव और चिंता के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव लार बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इससे मुंह सूखने या लार गाढ़ी होने का एहसास हो सकता है। वहीं, रात में मुंह खोलकर सांस लेने पर हवा लगातार मुंह के भीतर से गुजरती है। इससे मुंह की नमी कम हो सकती है और सुबह उठने पर मुंह सूखा महसूस हो सकता है। एलर्जी, सर्दी या नाक में रुकावट होने पर भी व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है। इसके अलावा खर्राटे और स्लीप एपनिया जैसी स्थितियों में भी मुंह सूखने की समस्या हो सकती है।
कुछ लोगों में उम्र बढ़ने के साथ लार ग्रंथियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा इस उम्र में कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल भी ड्राई माउथ की समस्या का कारण बन सकता है।
लार मुंह में एसिड को नियंत्रित करने, भोजन के बचे हुए कणों को हटाने और दांतों के इनेमल की सुरक्षा में मदद करती है। जब लार कम बनती है, तो ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इससे दांतों में कैविटी, मसूड़ों की परेशानी, मुंह से बदबू और मुंह में फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर ड्राई माउथ की जांच के लिए सबसे पहले मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी लेते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार कुछ जांच की जा सकती हैं।
- लक्षणों की जानकारी: मुंह कितनी बार सूखता है, खाना निगलने में परेशानी होती है या नहीं और कौन-सी दवाएं ली जा रही हैं।
- मुंह की जांच: मुंह में नमी, लार की मात्रा और दांतों-मसूड़ों की स्थिति देखी जाती है।
- लार की जांच: जरूरत पड़ने पर तय समय में बनने वाली लार की मात्रा मापी जाती है।
- अन्य जांचें: डायबिटीज या ऑटोइम्यून बीमारी का संदेह होने पर संबंधित ब्लड टेस्ट कराए जा सकते हैं।
ड्राई माउथ का इलाज इसकी वजह और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है।
- कारण का इलाज: अगर डायबिटीज या किसी दूसरी बीमारी के कारण मुंह सूख रहा है, तो उस बीमारी को नियंत्रित किया जाता है।
- दवाओं में बदलाव: किसी दवा के साइड इफेक्ट से ऐसा होने पर डॉक्टर उसकी खुराक बदल सकते हैं या दूसरी दवा दे सकते हैं।
- लार बढ़ाने के उपाय: शुगर-फ्री च्युइंग गम या लार बढ़ाने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- मुंह की नमी बनाए रखना: जरूरत पड़ने पर डॉक्टर कृत्रिम लार यानी सैलाइवा सब्स्टिट्यूट वाले उत्पाद इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं।
ध्यान रखें, किसी भी दवा को अपनी मर्जी से बंद या बदलना नहीं चाहिए। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कुछ आसान आदतें अपनाकर मुंह के सूखेपन से राहत पाने में मदद मिल सकती है:
- दिनभर थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें।
- शुगर-फ्री च्युइंग गम चबाएं, इससे लार बनने में मदद मिल सकती है।
- कैफीन वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन न करें।
- तंबाकू और शराब से दूरी रखें।
- मुंह की सफाई का ध्यान रखें और नियमित रूप से दांतों की जांच कराएं।
- रात में कमरे की हवा बहुत शुष्क हो तो ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करने पर विचार करें।
- नाक बंद रहने या मुंह से सांस लेने की समस्या हो तो उसका कारण पता कराएं।
अगर मुंह का सूखापन लगातार बना हुआ है या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें:
- बार-बार मुंह सूखना और पानी पीने के बाद भी राहत न मिलना।
- खाना चबाने या निगलने में परेशानी होना।
- मुंह में बार-बार छाले या फंगल संक्रमण होना।
- दांतों में बार-बार कैविटी होना या मसूड़ों में परेशानी होना।
- मुंह सूखने के साथ बहुत ज्यादा प्यास लगना या बार-बार पेशाब आना।
- मुंह सूखने के साथ आंखों में भी लगातार सूखापन रहना।
लगातार ड्राई माउथ को सिर्फ पानी की कमी समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच कराने से इसकी असली वजह का पता लगाने और सही इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।
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