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पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, वहीं सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने लगातार कई दिनों से ईरान के विभिन्न इलाकों में सैन्य कार्रवाई जारी रखी है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के बुशेहर, अहवाज और सीरिक समेत कई क्षेत्रों में विस्फोट हुए हैं। ईरान-इराक सीमा पर हुए एक हमले में दो लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबर है।
इस बीच ईरान ने आरोप लगाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में एक तेल टैंकर विस्फोट के बाद आग की चपेट में आ गया।
ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, सऊदी अरब के तट के पास एक जहाज पर हमला हुआ, जिससे उसमें आग लग गई।
वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। इन घटनाओं ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
क्षेत्रीय तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री आपूर्ति मार्गों पर खतरा बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या अन्य हथियार से हमला होने पर अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा।
अमेरिका की चेतावनी पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के नागरिक ढांचे पर हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान की रक्षा नीति “आंख के बदले आंख” के सिद्धांत पर आधारित है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने व्हाइट हाउस की प्राथमिकताओं और सैन्य अभियानों के लिए 95 अरब डॉलर के बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद भी देखने को मिले।
तनाव के बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत सऊदी अरब में शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भविष्य में क्षेत्र में परमाणु प्रसार (Nuclear Proliferation) को लेकर नई चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं।

रूस से कच्चे तेल के आयात में तेजी आने के बीच भारत ने मार्च से मई के दौरान करीब 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान रुपये में किया। आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा आयात में रुपये के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

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