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पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, जानिए क्यों बढ़ीं कीमतें

पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि WTI क्रूड में भी तेज उछाल दर्ज किया गया।
यह कई महीनों बाद पहली बार है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें इस स्तर तक पहुंची हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में संघर्ष का फिर से तेज होना और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते हमले हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम खत्म होने के बाद क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ गया है। इसके साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर क्षेत्र में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।
इस रास्ते से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचते हैं। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई थी। अब बाब-अल-मंदेब मार्ग पर भी सुरक्षा जोखिम बढ़ने से बाजार में चिंता और गहरा गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों रणनीतिक समुद्री मार्गों पर लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो वैश्विक तेल कीमतों में और तेजी आ सकती है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।
यदि ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

रूस से कच्चे तेल के आयात में तेजी आने के बीच भारत ने मार्च से मई के दौरान करीब 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान रुपये में किया। आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा आयात में रुपये के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, वहीं सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहा है।
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