नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध हुआ था।
.jpg&w=3840&q=75)
Navratri Special: नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध हुआ था। दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध किया। इसी वजह से देवी को महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है। विजयादशमी से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था।
शिवपुराण और देवी भागवत महापुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में महिषासुर से जुड़ी कथा का वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार, महिषासुर असुरों के राजा दंभ का पुत्र था। वह मायावी था और भैंसे का रूप धारण कर सकता था। कथा के अनुसार, महिषासुर ने कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और ऐसा वरदान प्राप्त किया, जिसके कारण देवता और दानव उसका वध नहीं कर सकते थे। इस वरदान के बाद वह शक्तिशाली हो गया। उसने देवराज इंद्र को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने ऐसी शक्ति उत्पन्न करने का निर्णय लिया, जो उसका वध कर सके। इसके बाद शिव, विष्णु और अन्य देवताओं के तेज से देवी दुर्गा प्रकट हुईं।
कथा में बताया गया है कि भगवान शिव के तेज से देवी का मुख और भगवान विष्णु के तेज से उनकी भुजाएं बनीं। यमराज, चंद्रमा, सूर्य, कुबेर, अग्नि और वायु सहित अन्य देवताओं के तेज से देवी के अलग-अलग अंगों का निर्माण हुआ।
देवी दुर्गा को सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र और दिव्य शक्तियां प्रदान कीं। भगवान शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने सुदर्शन चक्र, वरुण देव ने शंख, इंद्र ने वज्र और घंटा, जबकि अन्य देवताओं ने भी अपने दिव्य अस्त्र भेंट किए। हिमालय ने देवी को सवारी के लिए सिंह दिया।
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर दिया। इसी कारण उन्हें महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, दुर्गम कार्य को पूरा करने के कारण देवी का नाम दुर्गा पड़ा। नवरात्रि और विजयादशमी का पर्व इसी विजय की स्मृति से भी जुड़ा है।

मंडला के टाटरी इलाके में सीएम मोहन यादव ने अचानक स्कूल पहुंचकर सबको चौंका दिया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि भैया, पढ़ाई कैसी चल रही है?

गांवों की संपत्तियों का रिकॉर्ड बनाने वाली स्वामित्व योजना में करीब 50 लाख संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य है।

उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन और इंदौर के उद्योगपतियों से संवाद, गोरेलाल जी ने विनोद कुमार की यादें साझा कीं।
हर बड़ी ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट्स सीधे अपने फेसबुक फीड पर पाएं।
Follow Page