RBI ने लगातार तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा है। इसका असर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, EMI और FD पर फिलहाल नहीं पड़ेगा। साथ ही महंगाई, भविष्य की ब्याज दरों और दिसंबर की नीति बैठक को लेकर भी कई अहम संकेत मिले हैं। जानिए RBI के फैसले से जुड़ी हर जरूरी जानकारी एक ही जगह।

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत यानी बरकरार रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को इसका ऐलान करते हुए कहा कि महंगाई, वैश्विक आर्थिक हालात और घरेलू बाजार की मौजूदा तस्वीर को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। इस निर्णय का सीधा मतलब ये निकलेगा कि रेपो रेट से जुड़े होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की EMI में अभी कोई बदलाव नहीं होगा।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 अगस्त से शुरू हुई थी। तीन दिन तक चली पड़ताल के बाद केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही टिका रखने का निर्णय लिया। RBI के मुताबिक, इसका प्रमुख लक्ष्य महंगाई को काबू में रखना साथ-साथ आर्थिक विकास को संतुलित रफ्तार देना है। इसलिए मौजूदा हालात में ब्याज दरों को बिना बदले रहने का विकल्प चुना गया।
रेपो रेट में बदलाव न होने की वजह से फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पहले जैसी ही रहेगी। रेपो रेट आधारित नए लोन भी मौजूदा ब्याज दरों के आस पास पर मिलने के संकेत हैं। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में अभी बड़े स्तर की हलचल की उम्मीद नहीं है, लेकिन अलग-अलग बैंक अपनी फंडिंग लागत और बाजार की स्थिति को लेकर कुछ सीमित बदलाव कर सकते हैं,
RBI ने साल 2025 के दौरान कई चरणों में ब्याज दरों में कदम उठाए थे। फरवरी में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत किया गया। फिर अप्रैल और जून में भी कटौती की गई। दिसंबर में भी एक और नरमी के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर पहुंच गया, उसके बाद से लगातार तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में इसे इसी स्तर पर बनाए रखा गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव फिर से बढ़ता दिखा, तो RBI आगे की मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों की समीक्षा कर सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है। ऐसे में दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक निवेशकों, बैंकिंग सेक्टर और आम जनता सबके लिए अहम रहने की संभावना है।
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