Loading...
Loading...
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत से कहा कि भारत का लक्ष्य केवल ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करना नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार, रिसर्च और नई तकनीकों के विकास का नेतृत्व करना होना चाहिए।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत को अगले दशक में सिर्फ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का केंद्र बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि देश को वैश्विक स्तर पर नवाचार, अनुसंधान, नई तकनीक और उत्पाद विकास का नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बनाने की दिशा में काम किया जाए।
वह गुरुवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित GCC समिट को संबोधित कर रही थीं।
वित्त मंत्री ने कहा कि अब वैश्विक कंपनियां केवल कम लागत या सरकारी प्रोत्साहनों के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करतीं। उनके लिए मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem), प्रतिभा और अनुसंधान क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि भारत को लागत कम करने की सोच से आगे बढ़कर नवाचार को बढ़ावा देने, नए उत्पाद विकसित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।
निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बौद्धिक संपदा (IP), उन्नत अनुसंधान और स्वदेशी उत्पाद विकास में अधिक निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और उत्कृष्टता केंद्रों के साथ साझेदारी बढ़ाई जाए, ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित होने वाले नवाचार तेजी से बाजार तक पहुंच सकें।
वित्त मंत्री ने कहा कि GCC का अगला चरण केवल बेंगलुरु, हैदराबाद या गुरुग्राम जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने उद्योगों से वाराणसी, चंडीगढ़, विशाखापट्टनम, तिरुचिरापल्ली और मैसूर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश बढ़ाने की अपील की।
उनके अनुसार इन शहरों में प्रतिभा, बुनियादी ढांचा और नवाचार की क्षमता तेजी से विकसित हो रही है, जिससे वे वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक विकल्प बन रहे हैं।
सीतारमण ने कहा कि उद्योगों को राज्य सरकारों, स्थानीय प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इससे नए शहरों में निवेश का माहौल बेहतर होगा और संतुलित क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सफलतापूर्वक निवेश कर चुकी कंपनियों को देश की क्षमताओं का वैश्विक स्तर पर प्रचार करना चाहिए, ताकि अधिक विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके।

रूस से कच्चे तेल के आयात में तेजी आने के बीच भारत ने मार्च से मई के दौरान करीब 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान रुपये में किया। आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा आयात में रुपये के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, वहीं सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहा है।
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है।
पहली टिप्पणी करने वाले बनें!
हर बड़ी ख़बर, ब्रेकिंग न्यूज़ और लेटेस्ट अपडेट्स सीधे अपने इंस्टाग्राम पर पाएं।
Join Now