JPSC भर्ती परीक्षा विवाद झारखंड का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मुख्य परीक्षा रद्द होने, 19 गिरफ्तारियों, छात्रों के आमरण अनशन और सरकार के साथ वार्ता की कोशिशों के बीच मामला अभी भी जारी है। पढ़िए इस पूरे विवाद की शुरुआत से लेकर अब तक की पूरी टाइमलाइन और ताजा अपडेट।
रांची, झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा वाला विवाद बस लगातार और गहराता ही जा रहा है। परीक्षा के रिजल्ट पर उठे सवालों के बाद जो छात्र आंदोलन शुरू हुआ था , वो अब पूरे राज्य में एक तरह से चर्चा का विषय बन चुका है। मुख्य परीक्षा को रद्द करने की बात आई , साथ में 19 लोगों की गिरफ्तारी , आमरण अनशन, और सरकार वगैरह की तरफ से वार्ता कराने की कोशिश… लेकिन फिर भी मामला पूरी तरह थम नही रहा, सुलझा नही, समझें तो अभी बस पेचीदा ही चल रहा है। छात्र CBI और ED से जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार बातचीत के जरिए रास्ता निकालने का प्रयास कर रही है।
JPSC ने 2 जुलाई 2026 को 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों का चयन करके उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए भेजा गया। इसके बाद फिर कई अभ्यर्थियों का कहना शुरू हुआ कि कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नही किए गए थे, कथित OMR में गड़बड़ी हुई, और परिणाम पर अधिकारियों के हस्ताक्षर भी नही हैं, इस तरह के आरोप लगे। जब विवाद बढ़ता गया, तो आयोग को आखिरकार प्रस्तावित मुख्य परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
विवाद तेज होने के बाद 20 जुलाई को CID ने JPSC कार्यालय में छापेमारी कर कार्रवाई शुरू कर दी। उस समय के अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने फिर इस्तीफा दे दिया। उसके बाद 23 जुलाई को राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी CID को सौंप दी। फिर 25 जुलाई से छात्रों का आंदोलन चालू हुआ, और 2 अगस्त से छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठ गए। अब तक मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से बातचीत करने के लिए चार मंत्रियों की एक समिति बना दी है। वहीं प्रदर्शनकारी छात्र भी संवाद के लिए तैयार होने जैसी बात कर रहे हैं, पर दो शर्तों के साथ। उनकी मांग है कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री के साथ हो और बैठक में मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाए। फिलहाल देखा जाए तो, दोनों पक्षों के बीच कोई अंतिम सहमति अभी तक बन नही सकी है।
छात्रों का कहना है कि CBI और ED से जांच हो, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर साफ फैसला हो, और बाकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाए— जब तक ये नही होता तब तक आंदोलन चलता रहेगा। दूसरी तरफ सरकार का रुख यही है कि वार्ता के जरिए किसी समाधान तक पहुंचा जाए। तो अब सबकी नजर अगली बातचीत पर है, और यह भी कि जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं।
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