भोपाल शहर में शिक्षक भर्ती के पदों को बढ़ाने को लेकर चल रहे धरने पर बड़ी खबर है। सरकार ने साफ कह दिया है कि रिजल्ट के बाद पद नहीं बढ़ेंगे। उधर भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं की तबीयत बिगड़ गई है।

भोपाल में कई दिनों से डेरा डाले शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए सरकार की तरफ से एक बहुत ही निराश करने वाली खबर आई है। प्रदेश भर से आकर पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे इन युवाओं को शिक्षा विभाग ने साफ-साफ मना कर दिया है। विभाग के अफसरों का कहना है कि जब एक बार परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है, तो उसके बाद पदों की संख्या में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। अफसरों ने दो टूक कहा कि जो पद खाली पड़े हैं, उन्हें आने वाली नई भर्तियों में ही निकाला जाएगा, लेकिन इस पुरानी वाली भर्ती में पदों को बिल्कुल नहीं बढ़ाया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने खाली पदों की सच्चाई बताते हुए कहा है कि जो पद खाली दिख रहे हैं, वे दरअसल एससी और एसटी वर्ग के सही उम्मीदवार न मिलने के कारण बैकलॉग में पड़े हैं। सरकारी नियमों के मुताबिक इन आरक्षित पदों को जनरल या ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को नहीं दिया जा सकता। अफसरों ने यह भी कहा कि धरने पर बैठे लोगों की यह बात बिल्कुल गलत है कि खाली पदों पर भर्ती नहीं हो रही है, और यह कहना भी सरासर गलत है कि धरने पर बैठे लोग परीक्षा में सिलेक्ट हो चुके अभ्यर्थी हैं।
इससे पहले अपने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह जी ने भी स्थिति साफ करते हुए कहा था कि एक साथ सारे खाली पदों को भर देना मुमकिन नहीं है। अपने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन सभी जगहों को खाली मान लेना सही नहीं होगा। भर्ती करते समय आरक्षण, बैकलॉग और ओबीसी कोटे के नियमों का ध्यान रखना पड़ता है। हालांकि, मुख्यमंत्री जी की पूरी कोशिश है कि जितने जरूरी पद खाली हैं, उन्हें धीरे-धीरे भरा जाए।
इधर अपने भोपाल के धरना स्थल पर माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। कई दिनों से चल रहे इस धरने में तीन अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। धरने पर बैठे युवाओं का कहना है कि घर-परिवार की तंगी और मां-बाप के कहने पर ही वे अपने हक की लड़ाई लड़ने भोपाल आए हैं। लगातार भूखे रहने से अनशनकारी साथियों की तबीयत काफी बिगड़ गई है। इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इन युवाओं के समर्थन में खुलकर आ गए हैं और उन्होंने सरकार से कहा है कि बच्चों की मांगें बिल्कुल सही हैं और सरकार को तुरंत इस पर ध्यान देना चाहिए।

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