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अडानी एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन कारोबार में उतरने की खबरों को खारिज कर दिया है। कंपनी ने कहा कि वह फिलहाल एयरलाइन शुरू करने के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में अडानी समूह के विमानन क्षेत्र में नई एंट्री की अटकलें लगाई गई थीं।

अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन कारोबार में उतरने की खबरों का खंडन किया है। कंपनी ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि मीडिया में चल रही ऐसी सभी रिपोर्टें और बाजार में फैली अटकलें पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल एयरलाइन शुरू करने के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।
हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन संचालित करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर शुरुआती स्तर पर चर्चा चल रही है। चूंकि अडानी समूह देश के आठ हवाई अड्डों का संचालन करता है, इसलिए माना जा रहा था कि समूह भविष्य में एयरलाइन कारोबार में भी प्रवेश कर सकता है।
हालांकि कंपनी ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
इसी मुद्दे पर इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने कहा था कि यदि एयरपोर्ट संचालकों को एयरलाइन चलाने की अनुमति दी जाती है तो इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा हो सकती है। उनके अनुसार, इससे यात्रियों के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार भारतीय विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। वर्तमान में घरेलू बाजार में इंडिगो और एयर इंडिया समूह की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार नए खिलाड़ियों की एंट्री को बढ़ावा देने के विकल्पों पर चर्चा कर रही है।
हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
अडानी समूह पहले से ही देश के आठ एयरपोर्ट के संचालन के अलावा ग्राउंड हैंडलिंग, विमान रखरखाव (MRO), पायलट प्रशिक्षण और अन्य विमानन सेवाओं में सक्रिय है। इसके अलावा समूह ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के साथ साझेदारी में भारत में विमान निर्माण सुविधा स्थापित करने की भी योजना पर काम कर रहा है।

रूस से कच्चे तेल के आयात में तेजी आने के बीच भारत ने मार्च से मई के दौरान करीब 15 अरब डॉलर के आयात का भुगतान रुपये में किया। आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ऊर्जा आयात में रुपये के उपयोग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, वहीं सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहा है।
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